भारत ने युद्धग्रस्त गाजा की स्थिति पर जताई 'चिंता'

भारत ने गाजा में युद्ध को 'बड़ी चिंता' का विषय बताते हुए सोमवार को कहा कि संघर्षों से उत्पन्न मानवीय संकट के लिए एक स्थायी समाधान की आवश्यकता है जो सबसे अधिक प्रभावित लोगों को तत्काल राहत दे. संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के 55वें सत्र को संबोधित करते हुए विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि आतंकवाद और बंधक बनाना स्वीकार्य नहीं है और उम्मीद है कि यह संघर्ष क्षेत्र के भीतर या इससे बाहर तक नहीं बढ़ेगा.

भारत ने पिछले साल सात अक्टूबर को हमास द्वारा किए गए आतंकी हमले की कड़ी निंदा की थी. विदेश मंत्री ने नई दिल्ली से वीडियो लिंक के माध्यम से अपने संबोधन में कहा, 'साथ ही, हमें यह स्पष्ट होना चाहिए कि आतंकवाद और बंधक बनाना अस्वीकार्य है.' उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का हमेशा सम्मान किया जाना चाहिए. 

इस महीने की शुरुआत में म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन में एक इंटरैक्टिव सत्र में बोलते हुए, जयशंकर ने फिलिस्तीन मुद्दे पर भारत की लंबे समय से चली आ रही स्थिति पर प्रकाश डाला था. उन्होंने कहा था, "निश्चित रूप से भारत लंबे समय से दो-राज्य समाधान में विश्वास करता रहा है. हमने कई दशकों से उस स्थिति को बनाए रखा है और, मुझे लगता है, आज दुनिया के कई और देश महसूस करते हैं कि दो-राज्य समाधान न केवल आवश्यक है, बल्कि यह अब पहले के मुकाबले ज्यादा जरूरी है".

7 अक्टूबर को हमास आतंकवादियों द्वारा इजरायली शहरों पर किए गए अभूतपूर्व हमले के बाद इजरायल ने गाजा में अपना सैन्य आक्रमण तेज कर दिया था. हमास ने इज़राइल में लगभग 1,200 लोगों को मार डाला और 220 से अधिक अन्य लोगों का अपहरण कर लिया, जिनमें से कुछ को संक्षिप्त युद्धविराम के दौरान रिहा कर दिया गया था. वहां के अधिकारियों के अनुसार, गाजा में इजरायली हमले में लगभग 30,000 लोग मारे गए हैं.

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