येरुशलम में जुमे की नमाज के लिए हजारों सैनिकों को तैनात करेगा इजरायल

इजरायल के पुलिस बल ने कहा कि वह गाजा युद्ध के बीच तनाव को देखते हुए अल-अक्सा मस्जिद में रमजान के पहले शुक्रवार की नमाज के लिए यरूशलेम के पुराने शहर में हजारों सैनिकों को तैनात करेगा. पुलिस प्रवक्ता मिरिट बेन मेयर ने अल-अक्सा मस्जिद स्थल के लिए यहूदी नाम का उपयोग करते हुए संवाददाताओं से कहा, "हम अधिक पुलिस अधिकारियों के साथ जुमे की नमाज के लिए तैयार हैं. उनमें से हजारों लोग टेंपल माउंट के क्षेत्र में होंगे. 

उन्होंने कहा, "सोमवार को रमजान शुरू होने के बाद से इजरायल के कब्जे वाले पूर्वी येरुशलम के पुराने शहर में सैकड़ों पुलिस अधिकारी पहले से ही तैनात कर दिए गए हैं." बेन मेयर ने कहा कि "रोजे के महीने के शुरू होने के बाद से अभी तक 25,000 श्रद्धालु बिना किसी घटना के नमाज के लिए मस्जिद में आ चुके हैं." न्यूज कॉन्फ्रेंस में उन्होंने  कहा, "हम रमजान के महीने में शांति बनाए रखने की हर संभव प्रयास करेंगे."

रविवार को कथित तौर पर पुलिस और रोजा रखने वाले लोगों के बीच हुई झड़पों के बारे में पूछे जाने पर, सरकार की प्रवक्ता ताल हेनरिक ने कहा: "हम हाई अलर्ट पर हैं". उन्होंने कहा, इसमें कोई रहस्य नहीं है कि चरमपंथी, हमास जैसे आतंकवादी संगठन और (फिलिस्तीनी) इस्लामिक जिहाद इस क्षेत्र को भड़काने की कोशिश कर रहे हैं". 

पिछले हफ्ते प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के कार्यालय ने कहा कि रोजा रखने वाले मुस्लिमों को रमजान के पहले सप्ताह के दौरान पिछले वर्षों की तरह ही अल-अक्सा मस्जिद तक पहुंचने की अनुमति दी जाएगी. इसमें कहा गया, हर हफ्ते सुरक्षा और संरक्षा के लिहाज से स्थिति का आकलन किया जाएगा और उसके मुताबिक निर्णय लिया जाएगा. 

पुलिस ने एक बयान में कहा कि कब्जे वाले वेस्ट बैंक से अल-अक्सा आने वाले फिलिस्तीनियों को कुछ प्रतिबंधों का सामना करना पड़ सकता है. सरकार के प्रवक्ता ओफिर गेंडेलमैन ने कहा, "सुरक्षा कारणों से" क्षेत्र के केवल 55 वर्ष और उससे अधिक उम्र के पुरुषों और 50 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं को मस्जिद परिसर में प्रवेश करने की अनुमति दी जाएगी. इज़राइल के धुर दक्षिणपंथी राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन ग्विर ने हाल ही में वेस्ट बैंक के फिलिस्तीनी निवासियों पर कड़े प्रतिबंध लगाने का आह्वान करते हुए कहा था कि उन्हें रमज़ान के दौरान नमाज पढ़ने के लिए यरूशलेम में प्रवेश की "अनुमति नहीं दी जानी चाहिए". 

अल-अक्सा मस्जिद इस्लाम में तीसरा सबसे पवित्र स्थल है और तकीनीक रूप सेस इसका प्रबंधन जॉर्डन के अधिकार में आता है लेकिन इजरायल इसके परिसर में और उसके आसपास प्रतिबंध लगाता है. इस स्थल पर अक्सर मुस्लिम उपासकों और इज़रायली सुरक्षा बलों के बीच झड़पें होती रहती हैं. 

आधिकारिक इज़रायली आंकड़ों के आधार पर एएफपी टैली के अनुसार, हमास द्वारा इज़रायल पर 7 अक्टूबर के हमले के बाद युद्ध छिड़ गया था, जिसके परिणामस्वरूप लगभग 1,160 लोगों की मौत हो गई, जिनमें ज्यादातर नागरिक थे.

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