EXPLAINER: कैसे भारत के वैश्विक रिश्तों ने खालिस्तान विवाद में अलग-थलग कर डाला कनाडा को...
हाल ही में कनाडा ने दावा किया कि एक खालिस्तान-समर्थक सिख नेता की हत्या में भारतीय सरकारी एजेंटों का हाथ हो सकने की खुफिया जानकारी मिली है, और आमतौर पर इस तरह के आरोपों से सहयोगी देश भी आरोपित देश पर टूट पड़ते हैं, लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ, और कनाडा अलग-थलग पड़ गया. इस बार, चूंकि संयुक्त राज्य अमेरिका और अन्य देश भारत को चीन के काउंटर के तौर पर देख रहे हैं, इसलिए कूटनीतिक रूप से कनाडा पीछे छूट गया है.
समाचार एजेंसी रॉयटर की एक ख़बर के मुताबिक, कनाडाई शहर ओटावा स्थित कार्लेटन यूनिवर्सिटी में अंतरराष्ट्रीय संबंधों, यानी इंटरनेशनल रिलेशन्स की प्रोफेसर स्टेफनी कार्विन का कहना है, "चीन से मुकाबला करने की खातिर पश्चिमी देशों के लिए भारत अहम है, कनाडा नहीं..."
सिर्फ़ चार करोड़ की आबादी वाले कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने सोमवार को कहा था कि कनाडा अपने नागरिक हरदीप सिंह निज्जर की जून में हुई हत्या में भारतीय एजेंटों की संभावित शिरकत के 'भरोसेमंद आरोपों' की जांच कर रहा है.
ठीक उसी वक्त कनाडा इस मुद्दे पर फाइव आइज़ इंटेलिजेंस शेयरिंग अलायन्स जैसे अहम सहयोगियों के साथ भी बातचीत कर रहा था. फाइव आइज़ इंटेलिजेंस शेयरिंग अलायन्स में कनाडा के अलावा अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड शामिल हैं.
लंदन स्थित चैथम हाउस थिंक टैंक से भारत विशेषज्ञ के रूप में जुड़े क्षितिज बाजपेयी का कहना है कि ब्रिटेन मुश्किल हालात से गुज़र रहा है, क्योंकि वह कनाडा का समर्थन करने और भारत की मुखाल्फत करने के बीच उलझा हुआ है. ब्रिटेन दरअसल चीन से मुकाबला करने में मदद के लिए भारत को व्यापारिक भागीदार और सहयोगी के रूप में चाहता है.
बाजपेयी ने कहा, "भारत की शिरकत का कोई ठोस सबूत न होने के चलते मुझे लगता है कि ब्रिटेन की प्रतिक्रिया चुप्पी ही रहने की संभावना है..." उन्होंने यह भी कहा कि अगर मुक्त व्यापार समझौता हो जाता है, तो यह भारत और ब्रिटेन दोनों के लिए 'बड़ी राजनीतिक जीत' होगी.
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