'गुलों में रंग भरे वादे-नौबहार चले' से लेकर 'रंजिश ही सही दिल ही दुखाने के लिए आ', यहां सुनिए मेहदी हसन की सदाबहार नगमे
60 और 70 के दशक की शायद ही ऐसी कोई बड़ी फिल्म हो, जिसमें मेंहदी हसन का गाना न हो। आज उनकी पुण्यतिथि है। गायन के साथ उन्हें पहलवानी का भी शौक था। उन्हें 'किंग ऑफ गजल' और शहंशाह-ए-गजल भी कहा जाता था।
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