शाहरुख बने सुजॉय घोष के खेवनहार, इस फिल्म को बनाने की अनुमति दिलाने में की मदद

जिस तरह भारत में किसी भी काम को करवाने, यहां तक कि नौकरी पाने के लिए भी लोगों को एक दूसरे से व्यवहार बनाने की जरूरत होती है। ठीक वैसे ही हिंदी सिनेमा में भी ऐसे ही व्यवहार और एक दूसरे से जुड़ाव कभी भी काम आ सकते हैं।

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