'मेरा नाम मुसलमानों जैसा है 11 साल में ही टीबी हो गई थी तो पढ़ लीं मारी सारी किताबें'

बात ग़ालिबन 1976 की है। राही मासूम रज़ा लखनऊ आए हुए थे। उन्हें 'मिली' फ़िल्म के लिए सर्वश्रेष्ठ संवाद लेखक का पुरस्कार मिला था।

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